प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे शुरू करें?

प्रतियोगिता परीक्षा (Competitive Exam) की तैयारी कैसे शुरू करें? आसान और प्रभावी रणनीति

सरकारी नौकरी की तैयारी हो या अन्य Competitive Exam तैयारी यह बाहर से जितना देखने में सुंदर और आकर्षक लगता है अंदर से उतर ही चुनौतीपूर्ण और बेरहम है ।

हम जानते हैं हजारों नहीं बल्कि लाखों अभ्यर्थी इंटरमीडिएट, स्नातक और बहुत बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेने के बावजूद भी बेरोजगार रह जाते हैं इन लाखों लोगों में से अधिकांश की समस्या यह नहीं है कि उनमें प्रतिभा की कमी है, समस्या यह है कि शुरुआत कैसे और कहां से करनी है इसका रोडमैप उनके पास नहीं होता है ।

यदि आप भी इस भीड़ भरी प्रतियोगिता परीक्षा में जो बहुत ही कठिन चुनौती है और आपको यह समझने में कठिनाई हो रही है कि क्या करें क्या ना करें! जीरो लेवल से शुरुआत कैसे करें! और आप उसे मुहाने पर खड़े हैं जहां आपके मन में डर,संशय और भ्रम की स्थिति बनी हुई है तो नीचे दिए गए हमारे परामर्श आपके करियर के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होंगे ।

Competitive Exam

1.प्रतियोगिता परीक्षा (Competitive Exam) के लिए मानसिक मजबूती और लक्ष्य का स्पष्ट निर्धारण (Mental toughness and clear goal setting):

प्रारंभिक स्थिति में हम ख़ुद पर किताबों का बोझ नहीं डालेंगे बल्कि खुद मानसिक रूप से मजबूत करेंगे और चीजों को व्यवस्थित करने की कोशिश करेंगे से हमारी तैयारी आसान हो जाएगी और भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी.

क. अपना एक स्पष्ट लक्ष्य बनाएं (Set a clear goal for yourself):

अक्सर ऐसा देखा जाता है नए अभ्यर्थी समझ ही नहीं पाते कि हमें तैयारी किस परीक्षा की करनी है और किस परीक्षा को छोड़ देनी है l यहीं हम सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं lहम एक साथ Railway, SSC, state, PCS, UPSC, School Teacher जैसी बहुत सारी प्रतियोगी परीक्षाओं का फॉर्म भरने लगते हैं l इससे मानसिक उलझन और बढ़ जाती है ।

क्योंकि हर परीक्षा के कठिनाई का स्तर, सिलेबस भी अलग-अलग होता है l कभी-कभी तो परीक्षा की प्रकृति इतनी अलग होती है की दो सिलेबस के बीच जमीन आसमान का फर्क होता है ऐसे में वही बातचीत सिद्ध हो जाती है :-
“राम नाम कड़वा लगे, मीठे लागे दाम। दुविधा में दोनों गये, माया मिली न राम॥”

सबसे पहले खुद को जाने कि मुझे आखिर करना क्या है? मुझे किस क्षेत्र के प्रति ज्यादा लगाव है और मुझे उसकी समझ है l एक मुख्य लक्ष्य बनाएं और उसके प्रति कम से कम 2 से 3 वर्षों के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाए l

मुख्य लक्ष्य से तात्पर्य है कि हम जो बनना चाहते हैं उसे प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी मुख्य रूप से करेंगे l जब एक या एक से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के सिलेबस हमारे मुख्य लक्ष्य वाली परीक्षा से मिलते हैं, उनको सिर्फ वैकल्पिक तौर पर रखेंगे l कभी भी मुख्य लक्षित परीक्षा को किसी दूसरे परीक्षा से मिश्रित नहीं करेंगे l

ख.लंबी रेस का घोड़ा बने:

प्रतियोगिता परीक्षा कोई छोटी सी दूरी नहीं है जिसे हम बहुत ही जल्दी दौड़कर पूरा कर ले l इसके परिणाम त्वरित नहीं मिलते इसमें समय लगता है l इसमें निरंतर एक से तीन साल तक पूरे लगन, धैर्य के साथ अपने लक्ष्य के प्रति बहुत गहराई से समर्पित होना होगा l

2.सिलेबस( syllabus) को अच्छी तरह से समझना :

सिलेबस परीक्षा का केंद्र होता है या यों कहें कि सिलेबस परीक्षा का हृदय है l बिना सिलेबस को जाने ‘अंधेरे में तीर मारने’ जैसा है l
शुरुआत में निम्नलिखित चरणों पर जरूर कम करें-

क.डिजिटल के साथ-साथ हार्ड कॉपी (hard copy) का महत्व :

अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने सिलेबस को मोबाइल में तो रखते हैं लेकिन इसकी हार्ड कॉपी भी रखनी चाहिए l हार्ड कॉपी रखने के अपने फायदे हैं- क्योंकि हार्ड कॉपी मोबाइल के एप्स और नोटिफिकेशन के माध्यम से ध्यान को नहीं भटकाते हैं l इसमें मुख्य बिंदुओं को फोकस करने या टिक करने की सुविधा मोबाइल की अपेक्षाकृत बेहतर होती है ।

ख.पाठ्यक्रम को छोटे भागों में ( Micro Topics ) बांटें:

उदाहरण के लिए यदि आप -‘भारत का भौतिक भूगोल’ पढ़ रहे हैं, तो इसे कई भागों में वर्गीकृत करना बेहतर रहेगा, मसलन :

1.उत्तरी पर्वत श्रृंखला (Northern Mountains / Himalayas):
2.उत्तर भारत का विशाल मैदान (The Northern Plains):
3.प्रायद्वीपीय पठार (The Peninsular Plateau):
4.भारतीय मरुस्थल (The Thar Desert):
5.( तटीय मैदान(Coastal Plains):
6. भारतीय द्वीप समूह (The Islands)
:

इन Topics के भी कोई उपवर्ग हो सकते हैं. जब भी हम प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करें । हमें अच्छी तरह से पता हो कि क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है l कभी-कभी क्या पढ़ना है से ज्यादा महत्वपूर्ण क्या नहीं पढ़ना है, होता है ।

3.वर्षों के प्रश्नों(PYQs)का विश्लेषण:

परीक्षा की तैयारी की शुरुआती चरण में ही पिछले तीन-चार वर्षों के प्रश्नों (Previous Year Questions) का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना चाहिए । भले ही आपको प्रश्नों के उत्तर अज्ञात हों फिर भी उन प्रश्नों को हमें ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए ।

*लाभ :

इससे प्रश्नों के पैटर्न और गहराई का पता चलता है । प्रतियोगी परीक्षाओं में देखा जाता है कि कुछ चुनिंदा प्रश्न ऐसे होते हैं जिनको बार-बार घूम करके पूछा जाता हैं । विगत वर्षों के प्रश्न-पत्रों को देखने से हमें पूरी जानकारी मिल जाती है कि कौन-कौन से प्रश्न बार-बार दोहराए जा रहे हैं ।

4.नींव (Base) मजबूत करना -जीरो से हीरो तक :

बिल्कुल शुरुआत से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि उनका स्कूली बेस कमजोर होता है. ऐसे छात्रों को प्रमाणिक बेसिक किताबों के अध्ययन से शुरुआत करनी चाहिए।

क)सामान्य अध्ययन :

शुरुआती समय में NCERT की किताबें बहुत सहायक सिद्ध होती हैं l ऐसा करते समय हमें रटने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए । हमें विषयों की समझ और उनके बीच निरंतरता का संबंध विकसित करनी चाहिए ।

(ख)गणित :

सिक कॉन्सेप्ट्स पर ध्यान दें: प्रतिशत (Percentage), अनुपात (Ratio & Proportion), भिन्न (Fractions), औसत (Average) और साधारण जोड़-घटाव/वर्गमूल।
गणित विषय में अभ्यास की बहुत ज्यादा जरूरत होती है । अगर आपका बैकग्राउंड बिना मैथ वाला हो तो आप अभ्यास पर बहुत ज्यादा ध्यान दें और शुरुआती स्तर पर टिप्स और ट्रिक के चक्कर में ना पड़े ।

(ग)सामान्य बुद्धि एवं तर्क (General Intelligence & Reasoning):

रीजनिंग सिर्फ तर्कशक्ति का खेल है।
​कोडिंग-डिकोडिंग, दिशा परीक्षण, रक्त संबंध (Blood Relation) और सिलोजिज्म (Syllogism) के बुनियादी नियमों को एक बार समझें और 50-60 बेसिक सवाल हल करें।
रीजनिंग भी बार-बार अभ्यास करने की विषय वस्तु है।

​(घ)भाषा (हिंदी या English):

भाषा की बुनियादी समझ के लिए हमें हिंदी/ इंग्लिश की बेसिक व्याकरण का अध्ययन जरूर करना चाहिए ।
व्याकरण की शब्दावली और उनके विभिन्न वर्ग जैसे- संधि,समास, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया विशेषण ( Parts of Speech ) जैसे टॉपिक्स का रोजाना अभ्यास करना चाहिए ।

5.किताबें कम अभ्यास ज्यादा (Fewer books, more practice) :

‘Material syndrome’ का शिकार होने से बचें । हर नई किताब, हर किसी कोचिंग के नोट्स, टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर फैलाए गए pdf notes सबको एक जगह इकट्ठा करने की कोई जरूरत नहीं है, इससे समस्या का समाधान होने के बजाय समस्या बढ़ जाती है ।

  • हर एक विषय के लिए किसी एक प्रामाणिक किताब को रखेंगे या किसी एक कोचिंग के Notes का अध्ययन करें ।
  • 20 किताबें पढ़ने की बजाय एक ही किताब को 20 बार पढ़ें ।
  • जब पढ़ी गई किताब पर आपकी पकड़ मजबूत बन जाए तब आप संदर्भ पुस्तकों (Reference Books) का अध्ययन करें ।

6.व्यवहारिक दैनिक समय-सारणी ( Practical Daily Time Table) :

शुरुआती स्तर पर हमें बहुत घंटे पढ़ने से/ लंबे समय तक पढ़ने से बचना चाहिए l 5 से 6 घंटे गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई करना पर्याप्त रहेगा l शुरू में हमें निम्नलिखित रूटीन को फॉलो करना बेहतर रहेगा :

मैथ और रिजनिंग के कांसेप्ट को समझ कर प्रतिदिन 40 से 50 प्रश्नों को हल करना चाहिए।
GS या GK की किताबों को पढ़कर MCQ को हल करना चाहिए ।
बेसिक ग्रामर और राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय घटनाओं जैसे विषयों की समझ विकसित करनी चाहिए।
यों कहें व्यवस्थित अभ्यास ही आपको एक आदर्श प्रतियोगी अभ्यर्थी बना सकता है ।

नोट्स : क्या लिखें? क्या छोड़े?

पहला बार अध्ययन :

केवल पेंसिल से महत्वपूर्ण शब्दों को रेखांकित (Underline) करें। इस दौरान नोट्स बनाने की जरूरत नहीं है, हमें ध्यानपूर्वक अध्ययन करने की जरूरत है।

​दूसरी बार अध्ययन :

विषय के प्रवाह को समझें और मुख्य बिंदुओं पर टिक लगाएं।

तीसरी बार अध्ययन ( नोट्स ):

आप केवल वही चीज नोट करें जिसको आप बहुत ही आसानी से भूल जाते हैं और उन्हें याद रखना नितांत आवश्यक है (जैसे: महत्वपूर्ण तारीखें, अनुच्छेद, फॉर्मूले, समितियां इत्यादि )।
​ ऐसा करने से हम मूल परीक्षा के समय इन चीजों का अभ्यास बहुत जल्दी-जल्दी कर सकते हैं ।

फ्लोचार्ट, माइंड मैप और बुलेट पॉइंट्स का जितना संभव अधिक से अधिक प्रयोग करें।

​8.अभ्यास और टेस्ट (practice and test series):

बिना अभ्यास/ टेस्ट के मुख्य परीक्षा में बैठना वैसे ही है जैसे – ‘अंधेरे में तीर चलाना’ l ऐसा करने से आपका मनोबल गिरेगा और आगे की तैयारी पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा ।

*क्या करें?

कोई भी चैप्टर खत्म होने पर उससे संबंधित सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों को जरूर हल करें । वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का अभ्यास करें ।
विभिन्न विषयों को, जो आपके सिलेबस में हों को एक साथ मिश्रित करके मिला-जुला अभ्यास करें और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का टेस्ट दें ।
60 से 70% सिलेबस कवर करने के बाद हफ्ते में कम से कम 3 से 4 बार फुल-लेंथ मॉक-टेस्ट जरूर दें l ऐसा करने से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी को तीव्र गति मिलेगी और विश्वास का स्तर भी बढ़ेगा ।

मॉक टेस्ट देने के बाद इसका विश्लेषण अवश्य करें, ऐसा करने से जो प्रश्न गलत है वह बहुत जल्दी याद हो जाते हैं और वह मानस पटल पर स्थाई रूप से या बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं ।
जिस टॉपिक पर प्रश्न ज्यादा गलत हुए हैं या किस टॉपिक पर हमें ज्यादा समय लग रहा है, उस पर आगे विशेष ध्यान देना चाहिए ।

9.डिजिटल भटकाव (Digital Distraction):

वर्तमान समय में पढ़ाई और प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के सामने यह बहुत बड़ी समस्या है। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी बार-बार इस जाल में फंस जाते हैं (जैसे रील्स देखना, बार-बार नोटिफिकेशन चेक करना या बिना वजह ऐप्स स्क्रॉल करना) l डिजिटल भटकाव आपके समय और मानसिक ऊर्जा को बर्बाद करता है। इसका सीधा असर आपके प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी पर पड़ता है ।

*बचाव :

बहुत जरूरी चीजों को छोड़कर अपने मोबाइल से बाकी सभी नोटिफिकेशन को बंद कर दें ।
पढ़ाई के लिए जब मोबाइल के जरूरत नहीं होतो ऐसी स्थिति में ‘No Phone Zone’ ( जहां मोबाइल ले जाने की सख्त मना हो) का पालन करें .

सुबह के समय योगा, मेडिटेशन और एक्सरसाइज करते समय मोबाइल को अपने पास बिलकुल न रखें l
योगा,मेडिटेशन से पढ़ाई पर आपका ध्यान केंद्रित होगा और अनावश्यक कार्यों से आपकी दूरी बनेगी ।
मोबाइल से दूरी बनाने के लिए अन्य विकल्पों की तलाश करें जैसे कोई अन्य स्किल ( ड्राइंग, म्यूजिक, बुक रीडिंग, स्विमिंग आदि ) सीखना ।

ज़ब भी आपको मोबाइल देखने का मन करे तब खुद से कहें “अभी नहीं! मोबाइल देखने के लिए मेरे पास पर्याप्त समय है लेकिन करियर बनाने के लिए मेरे पास फिलहाल बहुत कम समय है । ऐसा करने से हमारा दिमाग तुरंत प्रतिक्रिया देने की इच्छा को धीरे-धीरे खत्म कर देता है ।

पोमोडोरो तकनीक (Pomodoro Technique) में आधे घंटे की पढ़ाई के अंतराल के बाद कुछ देर के लिए हम ब्रेक लेंगे l इस समय मोबाइल चलाने की जगह हम थोड़ी देर गहरी सांस लेते हुए आराम करेंगे या फिर पानी पियेंगे ।

एक दिन 12 घंटे पढ़ने से अच्छा है, लगातार तीन दिन हम चार घंटे पढ़ें । याद रखें, निरंतर और प्रतिदिन पढ़ने के बजाय एक दिन बहुत ज्यादा पढ़ लेना और फिर एक-दो दिन के लिए ब्रेक लेना है बहुत ज्यादा नुकसानदेह साबित होता है l निरंतर और सही रणनीति के साथ पढ़ाई ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है ।

सार (Conclusion):

जीरो से हीरो की दूरी 1 दिन में तय नहीं की जा सकती ।
प्रतियोगिता परीक्षा केवल हमारे बुद्धिमता की परीक्षा नहीं है l यह हमारे धैर्य, अनुशासन और निरंतर को भी परखता है ।

शुरुआत में समस्या होगी प्रश्नों के उत्तर गलत होंगे, पढ़ने से मन उब जाएगा, बार-बार मोबाइल को स्क्रोल करने का मन करेगा लेकिन जब हम संयम और पूरी निरंतरता के साथ तैयारी शुरू करेंगे तो धीरे-धीरे बुरी आदतें अपने आप दूर हो जाएंगी l

ये प्रसिद्ध और खूबसूरत पंक्तियाँ आपने पढ़ी या सुनी ही होंगी :

“मंजिल यूँ ही नहीं मिलती राही को,जुनून सा दिल में जगाना पड़ता है,पूछा चिड़िया से कि घोंसला कैसे बनता है,वो बोली कि तिनका-तिनका उठाना पड़ता है।

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