Supreme Court Order On TET : सभी शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) पास करना जरूरी !
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की योग्यता और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सेवा में कार्यरत (In-Service) शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। जिन शिक्षकों के सेवानिवृत्ति में पाँच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर TET पास करना होगा, अन्यथा वे सेवा में बने रहने के पात्र नहीं हो
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने ?
Supreme Court Order On TET: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का यह आदेश ‘स्टेट ऑफ यूपी बनाम अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट’ (State of UP v. Anjuman Ishaat-e-Taleem Trust) मामले में आया है, जिसमें कोर्ट ने 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया
अदालत ने साफ कहा कि “शिक्षकों की नौकरी बच्चों के भविष्य की कीमत पर नहीं टिक सकती” और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 23 के तहत TET एक संवैधानिक अनिवार्यता है, कोई औपचारिकता नहीं।
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करके पहले की समय सीमा (31 अगस्त 2027) को एक साल और बढ़ा दिया है। अब 31 अगस्त 2028 आखिरी तारीख है, इसके बाद कोई मोहल्लत नहीं मिलेगी।
राज्यों पर फैसले का प्रभाव :
उत्तर प्रदेश (UP) पर प्रभाव 2.5 लाख शिक्षक प्रभावित: उत्तर प्रदेश में लगभग 2.5 लाख ‘इन-सर्विस’ शिक्षक इस फैसले के दायरे में आते हैं। इसमें बड़ी संख्या में वे जूनियर हाई स्कूल शिक्षक और शिक्षा मित्र हैं जो पहले नियमित हुए थे।राज्य सरकार का रुख: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने के निर्देश दिए थे। उनका तर्क था कि ये शिक्षक अनुभवी हैं और सरकार इन्हें समय-समय पर ट्रेनिंग दे चुकी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज किए जाने के बाद अब यूपी सरकार को अगस्त 2028 तक सभी से परीक्षा पास करानी होगी।UPTET का आयोजन: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड को अब साल में दो बार UPTET परीक्षा आयोजित करनी होगी।
बिहार पर प्रभावनियोजित शिक्षकों पर दबाव: बिहार में लाखों की संख्या में पुराने ‘नियोजित शिक्षक’ हैं। हालाँकि बिहार सरकार ने हाल ही में ‘सक्षमता परीक्षा’ (Competency Test) लेकर इन्हें सरकारी कर्मचारी (विशिष्ट शिक्षक) का दर्जा देना शुरू किया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कक्षा 1 से 8 तक के उन सभी शिक्षकों के लिए STET या CTET पास करना अनिवार्य हो जाएगा जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय है।प्रमोशन पर रोक: जो शिक्षक सक्षमता परीक्षा तो पास कर चुके हैं, लेकिन TET पास नहीं हैं, उनके प्रमोशन (तरक्की) पर इस आदेश के बाद पूरी तरह रोक लग जाएगी।
अन्य राज्यों (तमिलनाडु, केरल आदि) पर संकटतमिलनाडु (Tamil Nadu): तमिलनाडु में स्थिति सबसे गंभीर है। राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में लगभग 3.9 लाख शिक्षक ऐसे हैं जो TET क्वालिफाइड नहीं हैं। इस फैसले से राज्य के पूरे शिक्षा ढांचे और शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी के अनुसार, इस आदेश से अकेले केरल में लगभग 50,000 शिक्षक प्रभावित होंगे I
सरकार द्वारा संकट टालने के लिए निम्नलिखित नीतिगत (policy) उपाय किए जा सकते हैं :
1. विशेष परीक्षा का आयोजन (Special TET)-राज्य सरकारें अपने स्तर पर कार्यरत (In-service) शिक्षकों के लिए एक विशेष या सरल पात्रता परीक्षा (Special TET) आयोजित करने का प्रस्ताव ला सकती हैं।तमिलनाडु मॉडल: तमिलनाडु सरकार ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखते हुए अपने इन-सर्विस शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।
2.सिलेबस में रियायत: सरकार इस विशेष परीक्षा के कठिनाई स्तर को थोड़ा कम रख सकती है, ताकि दशकों से पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षक इसे आसानी से पास कर सकें।
3.विधायी संशोधन (Legislative Intervention) – अंतिम विकल्पयदि स्थिति बहुत गंभीर होती है, तो शिक्षक संघों की मांग पर संसद (Parliament) के पास कानून बदलने की शक्ति होती है।RTE एक्ट में संशोधन: केंद्र सरकार संसद में RTE अधिनियम की धारा 23 में संशोधन करके 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को ‘TET अनिवार्यता’ से स्थायी छूट दे सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा की गुणवत्ता को मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21A) माना है, इसलिए ऐसा कोई भी संशोधन भविष्य में दोबारा कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।
